झिलमिल सितारों की ओट से मनमोहक चॉंद फिर निकला।
कई मुद्दतों के बाद दिलकश चॉंद फिर निकला।
साक्षी है यह अटूट प्रेम का,
गवाह है यह अक्षुण्ण नेह का,
प्रेम का साक्षी यह चॉंद यूं ही बिखेरता है मधुर चॉंदनी क़ायनात की हर शय पर, जैसे तुम्हारे निश्छल प्रेम की रागिनी सदैव बरसती है मुझ पर।
झिलमिल सितारों की ओट से मनमोहक चॉंद फिर निकला।
कई मुद्दतों के बाद दिलकश चॉंद फिर निकला।
प्रतीक है यह अद्वितीय सौंदर्य का,
मिसाल है यह अप्रतिम आभा का,
सौंदर्य का प्रतीक यह चॉंद धरा के नैसर्गिक सौंदर्य को चार चॉंद लगाता है जैसे, तुम्हारा विश्वास सदा मेरा मान बढ़ाता है।
झिलमिल सितारों की ओट से मनमोहक चॉंद फिर निकला।
कई मुद्दतों के बाद दिलकश चॉंद फिर निकला।
आधार है यह कवियों की कल्पनाओं का,
प्रेरणा है यह रचनाकारों की रचनाओं का,
कल्पनाओं का आधार यह चॉंद असंख्य प्रेमियों के विरह का अकेला साथी है, जैसे तुम्हारा स्नेह हर दुःख में मेरा संगी है।
झिलमिल सितारों की ओट से मनमोहक चॉंद फिर निकला।
कई मुद्दतों के बाद दिलकश चॉंद फिर निकला।
दृष्टांत है यह धीरज का,
साक्ष्य है यह साहस का,
धीरज का दृष्टांत यह चॉंद कई बार कलंकित होकर भी जीवन का संदेश देता है, जैसे तुम्हारा अनुराग अंधेरों में भी मेरा संबल है।
झिलमिल सितारों की ओट से मनमोहक चॉंद फिर निकला।
कई मुद्दतों के बाद दिलकश चॉंद फिर निकला।
प्रतीक है यह अखंड सौभाग्य का,
आशीष है यह अक्षय सुहाग का,
सौभाग्य का प्रतीक यह चॉंद हर वनिता को अखंड सौभाग्य का वर
देता है, जैसे तुम्हारा साथ मेरे जीवन का आलंबन है।
©अनीता सिंह 'अपराजिता'