कोमल हूँ कमजोर नहीं ..
क्यों बदल दूं अपना संकल्प ?
राह की दुविधाओं को देखकर
कोमल हूँ कमजोर नहीं ..!!
क्यों बदल दूं अपनी प्रतिज्ञा ?
पथ की दुर्गमताओं को देखकर
कोमल हूँ कमजोर नहीं ..!!
क्यों बदल दूं अपनी आकांक्षा ?
मार्ग की कठिनाईयों को देखकर
कोमल हूँ कमजोर नहीं ..!!
क्यों बदल दूं अपना उद्देश्य ?
रास्ते की अवरोधों को देखकर
कोमल हूँ कमजोर नहीं ..!!
क्यों बदल दूं अपनी धारणा ?
पंथ की बाधाओं को देखकर
कोमल कमजोर नहीं .!!
क्योंकि अंततः पहुंचना ही है
मुझे अपने गन्तव्य तक ..!!
क्योंकि अंततः पहुंचना ही है
मुझे अपने अभिप्राय तक ..!!
©अनीता सिंह ‘अपराजिता’