निश्छल प्रेम
पिछले दस दिनों से अमित रोज ऑफिस लेट पहुंचता है। रोज की तरह आज भी वह ऑफिस लेट आया। बॉस और उसके दोस्तों की प्रश्न भरी निगाहें उससे कई सवाल पूछती है लेकिन वह किसी का जवाब नहीं देता है और अपने केबिन में चला जाता है। बॉस उसे अपने केबिन में बुलाते हैं और कहते हैं - " अमित क्या बात है ? आजकल कई दिनों से देख रहा हूं तुम परेशान नजर आ रहे हो। ऑफिस भी लेट आते हो।" अमित ने बात को घुमा दिया और कहा - " ऐसी कोई बात नहीं सर ! सब ठीक है।"
शाम को घर पहुंच कर अमित सोफे पर ही लेट गया वह पुरानी स्मृतियों में खो जाता है ..अमित और आराधना बचपन से ही साथ-साथ खेलें,एक ही स्कूल में पढ़े। अमित बचपन से ही आराधना को बहुत पसंद करता था। उसकी हर छोटी से छोटी बात का ख़्याल रखता था लेकिन अपने दिल की बात उसे कभी बता नहीं पाया। आराधना का भी कोई काम अमित के बिना नहीं होता। वह अमित को अपना सबसे अच्छा, सबसे क़रीबी दोस्त मानती थी। समय बीतता गया। कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी हो गई। अमित अभी आराधना को अपने दिल की बात बताना ही चाहता था कि आराधना के घर वालों ने उसका रिश्ता एक धनाढ्य घर में तय कर दिया। आराधना समझदार तो थी लेकिन अभी भी उसमें बचपना बाक़ी था। वह खुश होकर अमित को फोन पर बताती है कि - "उसकी शादी शहर के सबसे अमीर घर में तय हो गई है।" यह सुनकर अमित का दिल टूट जाता है लेकिन फिर भी वह आराधना के लिए खुश होता है। इस तरह अमित के दिल की बात दिल में ही रह जाती है।
आराधना की शादी हो जाती है इधर अमित ख़ुद से बेखबर दिन रात उसकी याद में डूब जाता है। उसके परिवार वाले उसे समझाते हैं कि सब नसीब है। जो तुम्हारी तक़दीर में है ही नहीं फिर क्यों उसके लिए ख़ुद को तबाह कर रहे हो। कुछ महीनों बाद वह किसी तरह ख़ुद को संभालता है लेकिन आराधना को भूल नहीं पाता।
आराधना की शादी को दो वर्ष बीत गए। एक दिन अचानक अमित की फोन की घंटी बजती है। वह देखता है कि फोन पर आराधना की माताजी हैं, वह विस्मित हो उठता है। आज दो साल बाद आंटी ने कैसे याद किया। वह फोन उठाता है तो दूसरी तरफ से आंटी भर्राए हुए स्वर में अमित से उसका हालचाल पूछती है और कहती है - " बेटा ! यही पास में रहते हो लेकिन कभी घर नहीं आते। घर पर आओ आराधना आई हुई है। आराधना का नाम सुनते ही अमित सन्न - सा रह जाता है जैसे उसके हृदय से किसी आत्मीय को हमेशा के लिए छीन लिया गया हो। वह फोन पर कहता है - "ज़रूर आंटी ! मैं आप सब से कल मिलने आता हूं।"
आज अमित आराधना के घर जा रहा है, मन में एक संकोच सा है। जैसे ही वह दरवाजे की घंटी बजाता है जल्दी से कोई दरवाजा खोल देता है। मानो घंटों से कोई उसके लिए प्रतीक्षारत बैठा हो। वह देखता है सामने आराधना खड़ी है। वह अमित को देखते ही उसके गले लग कर फूट-फूट कर रोने लगती है। अमित हतप्रभ हो जाता है। वह पूछता है - "आराधना रो क्यों रही हो ? क्या हुआ ? यह क्या हाल बना रखा है तुमने ?" आराधना शादी के बाद की सारी कहानियां अमित को बताती है। वह कहती है कि उसके ससुराल में रुपए - पैसे की कोई कमी न थी लेकिन आज़ादी बिल्कुल नहीं थी। उसका पति अय्याश क़िस्म का इंसान है। उसके न जाने कितनी औरतों से नाजायज संबंध है। आए दिन वह उस पर अत्याचार करता था। प्रतिदिन वह उसके द्वारा दी हुई पीड़ा को सहती थी। ससुराल वाले भी अपनी बेटे का ही पक्ष लेते थे। दो साल तक वह मौन रह कर सब कुछ सहती रही। मायके वालों से भी अपने दिल की बात बता नहीं पाई कि समाज उसे और उसके मायके वालों को ही कटघरे में खड़ा कर देगा। लेकिन धीरे-धीरे पिताजी और ताऊ जी को सारी बात पता चल गई और उन्होंने फैसला किया कि तुमने बहुत अत्याचार सह लिए अब और नहीं .. तुम अब इस वहशी के साथ और नहीं रह सकती। तुम्हें अपने पति से तलाक लेना ही होगा।
अमित सारी कहानी सुन कर आहत होता है। वह आराधना से कहता है - "अब आगे क्या करना चाहती हो ? तुम्हारी रुचि किसमें है ? तुमने भी तो मेरी तरह एम.बी.ए. किया है तो क्या किसी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करना चाहती हो तो बताओ ?
आराधना कहती है - " उसे फैशन डिजाइनर बनना है। अमित ! क्या तुम मेरा साथ दोगे ?" अमित मुस्कुराते हुई कहता है - "यह भी कोई पूछने की बात है।"
रात में घर वापस आने के बाद अमित इसी उधेड़बुन में लगा रहता है कि वह आराधना का दाखिला शहर के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में कैसे कराएं। आराधना एंट्रेंस की तैयारी करती है और आख़िरकार अमित की बदौलत उसे शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन मिल जाता है। वह अपनी फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई में जी जान से लग जाती है। आराधना पढ़ाई से जुड़ी हर बात रोज़ अमित को बताती है। साल पर साल बीतते गए। आराधना का अपने पति से तलाक हो जाता है। आराधना की पढ़ाई भी पूर्ण हो गई और वह गोल्ड मेडल के साथ कॉलेज में सर्वोत्तम अंको से उत्तीर्ण होती है। अमित उसकी उपलब्धियों से विह्वल हो उठता है। आराधना फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में दिनों दिन उपलब्धि हासिल करती है। अमित हर कदम पर उसके साथ होता है। अमित सोचता है कि अब वह अपने दिल की बात आराधना को बता देगा .. लेकिन तभी एक दिन फैशन जगत के एक ख्याति प्राप्त नवयुवक का आराधना से शादी का प्रस्ताव आता है। वह आराधना के अतीत के बारे में सब जानता है और आराधना से शादी करना चाहता है। आराधना के घरवाले अमित से कहते हैं कि - "तुम ही आराधना को समझाओ कि वह शादी कर ले। फिर ऐसा रिश्ता नहीं मिलेगा।" अमित आराधना को अपने घर बुलाता है और उससे कहता है कि -"आराधना ! तुम शादी कर लो। कब तक यूं ही अकेली रहोगी। राहुल एक होनहार लड़का है वह तुम्हें सुखी रखेगा।" यह सुनकर आराधना अपना धैर्य खो देती है वह कहती है -" अमित ! तुम भगवान बनने की कोशिश मत करो। तुम कैसे रहोगे ? तुमने मुझे कुछ नहीं बताया तो क्या समझते हो तुम्हारे दिल की बात मुझ तक नहीं पहुंची। मैं तुम्हें छोड़ कर अब किसी और से शादी कर ही नहीं सकती। अमित ! तुमसे ज़्यादा मुझे कोई और समझ ही नहीं सकता .. तुम्हारे बग़ैर मैं अब एक पल भी नहीं रह सकती।" यह कह कर आराधना अमित के गले लग जाती है ..!!
©अनीता सिंह 'अपराजिता'